मेड की सैलरी कैसे बढ़ाएं — देहरादून मे
Author : Labour Wala | Published On : 13 Oct 2026
एक ही मोहल्ले में दो औरतें काम करती हैं। दोनों मेहनती हैं, दोनों रोज़ जाती हैं। लेकिन एक को 8,000 मिलते हैं और दूसरी को 14,000।
फर्क मेहनत का नहीं है। फर्क इस बात का है कि एक को वो काम आता है जो दूसरी को नहीं आता।
यहाँ बताया है कि देहरादून में कौन सा काम सीखने से सैलरी कितनी बढ़ती है, और सबसे पहले क्या सीखना चाहिए।
1. खाना बनाना — सबसे बड़ा फायदा
यही सबसे बड़ा फर्क है। जो सिर्फ सफाई करती है उसकी सैलरी अलग, और जो खाना भी बनाती है उसकी अलग।
वजह सीधी है। अगर आप खाना नहीं बनातीं, तो family को दो लोग रखने पड़ते हैं।
खाने में भी सैलरी की सीढ़ी है:
- रोज़ का खाना — दाल, सब्ज़ी, रोटी, चावल। ये सबसे नीचे की सीढ़ी है।
- नॉन-वेज — चिकन, मटन, मछली। देहरादून में ये बनाने वाली कम मिलती हैं, इसलिए पैसे ज़्यादा मिलते हैं।
- साउथ इंडियन — डोसा, इडली, सांभर। बहुत कम लोग बना पाते हैं। इसीलिए रेट सबसे ऊपर।
- कई तरह का खाना — मेहमान आ जाएं, पार्टी हो, किसी को परहेज़ का खाना चाहिए — सब संभाल लें।
सबसे तेज़ फायदा: एक नॉन-वेज डिश या एक साउथ इंडियन नाश्ता अच्छे से सीख लीजिए। इतने से ही सैलरी में साफ फर्क आ जाता है।
कुक की पूरी सैलरी की जानकारी यहाँ है: देहरादून में कुक की सैलरी
2. जापा का काम — सबसे ज़्यादा पैसा
डिलीवरी के बाद पहले 40 दिन माँ और बच्चे की देखभाल — इसे जापा का काम कहते हैं। देहरादून में घर के कामों में सबसे ज़्यादा पैसा इसी में है।
और families इसके लिए डिलीवरी से हफ्तों पहले बुकिंग करा लेती हैं, क्योंकि अच्छी जापा वाली मिलती ही नहीं।
इस काम में क्या आना चाहिए:
- छोटे बच्चे को सही से उठाना और संभालना
- बच्चे और माँ की मालिश
- नवजात बच्चे को नहलाना
- दूध पिलाने में मदद
- रात को जागना, ताकि माँ आराम कर सके
काम मुश्किल है, रात की नींद टूटती है। इसीलिए कम लोग करते हैं, और इसीलिए पैसे ज़्यादा मिलते हैं।
जापा का काम क्या होता है, पूरी जानकारी: जापा मेड क्या होती है
3. बुज़ुर्गों और मरीज़ों की देखभाल
जिन families में बुज़ुर्ग माता-पिता हैं, या कोई ऑपरेशन के बाद घर पर है — वो आम काम से ज़्यादा पैसे देती हैं।
और एक बार अच्छी attendant मिल जाए तो सालों रखती हैं, क्योंकि दूसरी ढूंढना बहुत मुश्किल होता है।
इसमें क्या ज़रूरी है:
- उठाने-बिठाने और चलाने में मदद करना — बिना उन्हें या खुद को चोट लगाए
- नहलाना और साफ-सफाई, जब वो खुद न कर पाएं
- बेड पर पड़े मरीज़ को हर दो घंटे में करवट दिलाना, ताकि घाव न बनें
- दवाई का टाइम याद रखना
- कुछ गड़बड़ लगे — बुखार, सूजन, अजीब बर्ताव — तो तुरंत family को बताना
इसके लिए कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। बस ध्यान, सब्र और नरमी चाहिए। family एक हफ्ते में पहचान जाती है।
4. भरोसा — जो सीखा नहीं जाता, बनता है
ये कोई स्किल नहीं है, लेकिन सैलरी पर सबसे ज़्यादा असर डालता है।
जिस मेड को घर में अकेला छोड़ा जा सकता है, जिसे चाबी दी जा सकती है, जो सब्ज़ी के पैसे संभाल ले, जिसे बार-बार बताना न पड़े — ऐसी मेड को families हाथ से जाने नहीं देतीं।
भरोसा छोटी-छोटी बातों से बनता है:
- रोज़ एक ही टाइम पर पहुँचना
- देर हो रही हो तो पहले बता देना, फोन बंद न करना
- कोई चीज़ टूट जाए तो छुपाने के बजाय बता देना
- एक घर की बात दूसरे घर में न करना
और अगर आपके documents verify हैं, तो families और भी ज़्यादा भरोसा करती हैं — क्योंकि भरोसे के पीछे कागज़ होता है। कौन से documents चाहिए: रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी कागज़
5. रोज़ टाइम पर पहुँचना — सबसे कीमती बात
देहरादून की किसी भी family से पूछ लीजिए कि उन्हें मेड में क्या सबसे ज़्यादा चाहिए। जवाब कोई स्किल नहीं होगा।
जवाब होगा — जो रोज़ आए।
जो मेड रोज़ टाइम पर आती है और छुट्टी पहले बता देती है, वो उस मेड से ज़्यादा कीमती है जो खाना बेहतर बनाती है लेकिन कभी भी गायब हो जाती है। ऐसी मेड को families सैलरी बढ़ाकर रखती हैं, और पड़ोसियों को भी बताती हैं।
यही वजह है कि सबसे अच्छी कमाई करने वाली मेड को काम ढूंढना ही नहीं पड़ता। काम खुद उस तक पहुँचता है।
6. छोटी-छोटी बातें जो जुड़कर फर्क डालती हैं
- वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, मिक्सर सही से चलाना आना
- कपड़े अच्छे से प्रेस करना — ये बहुत families को चाहिए और कम लोगों को आता है
- किचन की सफाई — खाना ढककर रखना, अलग कपड़ा इस्तेमाल करना, हाथ धोना। families ये तुरंत नोटिस करती हैं
- थोड़ी-बहुत English समझ लेना, क्योंकि कुछ घरों में वही बोली जाती है
- WhatsApp पर मैसेज पढ़कर जवाब दे देना — आजकल ज़्यादातर families इसी से टाइम बताती हैं
सबसे पहले क्या सीखें
अगर अभी सिर्फ सफाई का काम करती हैं और कमाई बढ़ानी है, तो इस क्रम में चलिए:
- पहले — खाना बनाना। शुरुआत रोज़ के खाने से, फिर एक नॉन-वेज डिश या एक साउथ इंडियन नाश्ता।
- फिर — जापा या बुज़ुर्गों की देखभाल। दोनों में काम करने वाले कम हैं, और दोनों में पैसे ज़्यादा।
- साथ-साथ — भरोसा और टाइम की पाबंदी। इसमें पैसा नहीं लगता, कुछ महीने लगते हैं, और ये किसी भी स्किल से ज़्यादा काम आता है।
ये तीनों काम करते-करते सीखे जा सकते हैं। किसी कोर्स या सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं।
एक ज़रूरी बात — सैलरी की बात करना
अगर आपका काम बढ़ गया है — पहले सिर्फ सफाई थी, अब खाना भी बनाती हैं, या घर में बच्चा हो गया और अब उसे भी संभालती हैं — तो सैलरी भी बढ़नी चाहिए।
बहुत सी महिलाएं चुपचाप ज़्यादा काम करती रहती हैं और कभी बात नहीं करतीं, फिर साल भर बाद मन में कड़वाहट रह जाती है।
इज़्ज़त से एक बार कह देना बिल्कुल सही है — काम बढ़ गया है, सैलरी की बात कर लेते हैं। ज़्यादातर families मान जाती हैं, क्योंकि अच्छी मेड को बदलना उनके लिए सैलरी बढ़ाने से ज़्यादा महंगा पड़ता है।
बात करने से पहले मार्केट रेट पता होना चाहिए। अभी का रेट यहाँ देखिए: देहरादून में मेड की सैलरी
काम कहाँ ढूंढें
Labourwala (AARS Manpower Solution Pvt. Ltd.) देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश की families में मेड, कुक, जापा वाली, ड्राइवर और केयरटेकर को काम दिलवाता है। काम ढूंढने वालों से कोई फीस नहीं ली जाती। फीस family देती है।
कौन-कौन से काम हैं और कितनी सैलरी मिलती है: देहरादून में घर के काम की नौकरी
और अगर कोई एजेंट आपसे पैसे मांगे, तो पहले ये पढ़ लीजिए: बिना फीस के मेड या कुक की नौकरी कैसे पाएं
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पता: जागृति एन्क्लेव लेन नंबर 3, टच वुड स्कूल के सामने, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून, उत्तराखंड 248001
