The Photograph Taken Tomorrow – कल खींची गई तस्वीर
Author : Divant Sharma | Published On : 21 Oct 2026
ईशा को फोटोग्राफी का बहुत शौक था।
वह हर जगह तस्वीरें खींचती थी।
एक दिन उसे अपने पुराने कैमरे में एक ऐसी तस्वीर मिली, जो उसने कभी खींची ही नहीं थी।
तस्वीर में ईशा अपने कमरे में खड़ी थी।
उसके पीछे खिड़की के पास एक आदमी दिखाई दे रहा था।
आदमी का चेहरा धुंधला था।
तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी—
अगले दिन की।
तस्वीर में कौन था?
ईशा ने तस्वीर को ज़ूम करके देखा।
आदमी के हाथ में एक छोटा कागज़ था।
उस पर लिखा था—
"आज रात बाहर मत जाना।"
ईशा ने सोचा कि शायद कैमरे की तारीख गलत होगी।
उसने कैमरे की सेटिंग जाँची।
सब सही था।
फिर उसने तस्वीर अपने दोस्त को दिखाई।
दोस्त ने पूछा—
"यह आदमी तुम्हारे पीछे खड़ा था?"
ईशा ने कहा—
"नहीं।"
दोस्त ने जवाब दिया—
"तो फिर तस्वीर खींचने वाला कौन था?"
दूसरी तस्वीर
उस रात ईशा ने कैमरा अपने कमरे में रख दिया।
वह सोने चली गई।
सुबह कैमरे में एक नई तस्वीर थी।
इस बार वह अपने घर के दरवाज़े पर खड़ी थी।
पीछे वही आदमी था।
उसके चेहरे पर अब भी धुंध थी।
तस्वीर के नीचे लिखा था—
"तुमने मेरी बात नहीं मानी।"
ईशा ने घबराकर दरवाज़ा खोला।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन फर्श पर गीले जूतों के निशान थे।
कैमरे का रहस्य
ईशा कैमरा लेकर एक पुराने फोटोग्राफर के पास पहुँची।
उसने तस्वीरें देखकर कहा—
"यह कैमरा किसका था?"
ईशा ने बताया कि उसे यह कैमरा अपने दादाजी के सामान में मिला था।
फोटोग्राफर ने कैमरे के पीछे एक छोटा निशान दिखाया।
उसने कहा कि उसके दादाजी तस्वीरें खींचने के लिए मशहूर थे।
लेकिन उनकी मृत्यु के बाद कैमरा गायब हो गया था।
कहा जाता था कि वह कैमरा उन घटनाओं की तस्वीरें खींचता था, जो अभी हुई ही नहीं थीं।
तीसरी तस्वीर
ईशा ने कैमरा घर लाकर अलमारी में बंद कर दिया।
उसने तय किया कि वह अब इसे इस्तेमाल नहीं करेगी।
लेकिन आधी रात को कैमरे की फ्लैश चमकी।
सुबह उसने तस्वीर देखी।
इस बार तस्वीर में ईशा बिस्तर पर सो रही थी।
उसके कमरे के कोने में वही आदमी खड़ा था।
तस्वीर के पीछे लिखा था—
"अब मैं तस्वीर में नहीं हूँ।"
ईशा ने कमरे के कोने की तरफ देखा।
वहाँ कोई नहीं था।
फिर उसके पीछे से कैमरे की क्लिक सुनाई दी।
आखिरी तस्वीर
ईशा ने पलटकर देखा।
कैमरा फर्श पर पड़ा था।
उसकी स्क्रीन पर एक नई तस्वीर थी।
तस्वीर में ईशा कैमरे को हाथ में पकड़े खड़ी थी।
लेकिन तस्वीर के अंदर वाली ईशा मुस्कुरा नहीं रही थी।
वह डरकर किसी चीज़ की तरफ देख रही थी।
उसके पीछे धुंधला आदमी अब बिल्कुल साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह आदमी ईशा के दादाजी जैसा दिखता था।
तभी कैमरे की स्क्रीन पर शब्द उभरे—
"अब अगली तस्वीर तुम्हारी नहीं होगी।"
अगली सुबह कैमरा कमरे में था।
लेकिन ईशा गायब थी।
उसकी मेज़ पर एक नई तस्वीर रखी थी।
तस्वीर में उसका कमरा खाली था।
और खिड़की के बाहर कोई कैमरा लेकर खड़ा था।
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क्या तस्वीरें भविष्य दिखा सकती हैं, या कोई भविष्य को तस्वीरों में बदल रहा था?
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