The Phone That Rang After Death – मौत के बाद बजने वाला फोन
Author : Divant Sharma | Published On : 13 Oct 2026
सिमरन के पिता की मृत्यु को तीन महीने हो चुके थे।
उनकी पुरानी चीज़ें अब भी घर की अलमारी में रखी थीं।
उनमें उनका मोबाइल फोन भी था।
वह फोन बंद था।
सिमरन ने उसे कई बार चार्ज करने की कोशिश की, लेकिन वह चालू नहीं हुआ।
एक रात वह अपने कमरे में बैठी थी।
तभी अचानक अलमारी के अंदर से आवाज़ आई—
ट्रिन...
ट्रिन...
उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
आवाज़ उसके पिता के बंद पड़े मोबाइल की थी।
अनजान नंबर
सिमरन ने अलमारी खोली।
मोबाइल की स्क्रीन जल रही थी।
स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।
सिर्फ़ लिखा था—
"पापा कॉलिंग..."
सिमरन के हाथ काँपने लगे।
उसने कॉल उठाई।
कुछ सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं आई।
फिर एक धीमी आवाज़ सुनाई दी—
"बेटा, दरवाज़ा मत खोलना।"
सिमरन की साँस रुक गई।
वह आवाज़ उसके पिता की थी।
दरवाज़े पर दस्तक
उसी समय मुख्य दरवाज़े पर दस्तक हुई।
ठक...
ठक...
ठक...
बाहर से आवाज़ आई—
"बेटा, दरवाज़ा खोलो। मैं आ गया।"
सिमरन के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।
बाहर की आवाज़ भी उसके पिता जैसी थी।
लेकिन उसके पिता को गुज़रे हुए तीन महीने हो चुके थे।
फोन पर आवाज़ फिर आई—
"सिमरन, मेरी बात सुनो। दरवाज़ा मत खोलना।"
बाहर से फिर आवाज़ आई—
"बेटा, मैं बहुत देर से बाहर खड़ा हूँ।"
पुरानी याद
सिमरन ने दरवाज़े के पास जाकर झाँकने की कोशिश की।
फोन पर पिता ने कहा—
"याद है, जब तुम छोटी थीं, मैं तुम्हें एक बात बताता था?"
सिमरन रोते हुए बोली—
"क्या?"
उन्होंने कहा—
"अगर कभी मेरी आवाज़ सुनो, लेकिन मेरा चेहरा न देख पाओ, तो मेरी बात मत मानना।"
सिमरन को बचपन की वह बात याद आ गई।
उसके पिता ने उसे हमेशा अनजान आवाज़ों से सावधान रहने को कहा था।
लेकिन आज दरवाज़े के बाहर जो खड़ा था, वह आवाज़ में बिल्कुल उनके जैसा था।
दरवाज़े के नीचे से आया कागज़
कुछ देर बाद दस्तक बंद हो गई।
सिमरन ने राहत की साँस ली।
तभी दरवाज़े के नीचे से एक कागज़ अंदर सरकाया गया।
उस पर लिखा था—
"मुझे पता है तुमने फोन उठा लिया है।"
सिमरन ने फोन की तरफ देखा।
कॉल अब भी चालू थी।
पिता की आवाज़ फुसफुसाई—
"बेटा, पीछे मत देखना।"
सिमरन के कमरे के पीछे से किसी के चलने की आवाज़ आई।
धीरे-धीरे।
बिल्कुल उसके करीब।
घर में कौन था?
सिमरन ने काँपते हुए पूछा—
"पापा, आप कहाँ हैं?"
फोन से जवाब आया—
"मैं तो तुम्हारे साथ नहीं हूँ, बेटा।"
सिमरन की आँखों से आँसू निकल आए।
"तो फिर दरवाज़े के बाहर कौन है?"
कुछ पल तक खामोशी रही।
फिर पिता की आवाज़ आई—
"जो मेरी आवाज़ चुरा सकता है, वह तुम्हारी भी चुरा सकता है।"
उसी समय कमरे की लाइट बंद हो गई।
आखिरी कॉल
अगली सुबह सिमरन की माँ ने उसे कमरे में बेहोश पाया।
मुख्य दरवाज़ा अंदर से बंद था।
घर में कोई नहीं था।
पिता का पुराना मोबाइल फिर बंद पड़ा था।
सिमरन ने किसी को रात की बात बताई, लेकिन किसी ने विश्वास नहीं किया।
उसने मोबाइल को हमेशा के लिए अलमारी में बंद कर दिया।
तीन दिन बाद रात को फिर फोन बजा।
इस बार स्क्रीन पर लिखा था—
"मम्मी कॉलिंग..."
सिमरन की माँ उस समय उसके सामने बैठी थीं।
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
और फोन अपने आप उठ गया।
उसमें से सिमरन की ही आवाज़ आई—
"मम्मी, दरवाज़ा खोल दो। मैं बाहर हूँ।"
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फोन पर आवाज़ किसकी थी?
और अगर वह सिमरन की आवाज़ थी...
तो उसके सामने बैठी सिमरन कौन थी?
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