The Old Tree House – पेड़ पर बने पुराने घर का रहस्�

Author : Divant Sharma | Published On : 10 Aug 2026

गाँव से बाहर एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ था।

उसकी सबसे ऊँची शाखाओं के बीच लकड़ी का एक छोटा-सा कमरा बना हुआ था। गाँव के बच्चे उसे पेड़ वाला घर कहते थे।

कई सालों से वह कमरा बंद था।

किसने बनाया था, यह किसी को पता नहीं था।

लोग बस इतना जानते थे कि शाम के बाद उस पेड़ के पास जाना मना था।

 


 

रोहन की जिज्ञासा

रोहन को गाँव की पुरानी जगहों के बारे में जानने का बहुत शौक था।

एक दिन उसने अपने दोस्त से पूछा—

"उस पेड़ पर बने कमरे में क्या है?"

दोस्त ने कहा—

"कुछ नहीं।"

रोहन हँस पड़ा।

"अगर कुछ नहीं है तो बंद क्यों है?"

दोस्त ने जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

"क्योंकि वहाँ से कभी-कभी किसी के चलने की आवाज़ आती है।"

 


 

रात की चुनौती

उसी रात रोहन ने पेड़ के पास जाने का फैसला किया।

रात करीब 12 बजे वह टॉर्च लेकर वहाँ पहुँचा।

हवा बिल्कुल शांत थी।

लेकिन जैसे ही वह पेड़ के पास पहुँचा...

ऊपर से लकड़ी के फर्श पर किसी के चलने की आवाज़ आई।

ठक... ठक... ठक...

रोहन ने टॉर्च ऊपर की।

कमरे का दरवाज़ा बंद था।

फिर अंदर से आवाज़ आई—

"रोहन..."

वह वहीं रुक गया।

उसे समझ नहीं आया कि अंदर कोई उसका नाम कैसे जानता था।

 


 

सीढ़ियाँ

पेड़ पर चढ़ने के लिए पुरानी लकड़ी की सीढ़ियाँ लगी थीं।

रोहन धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा।

हर सीढ़ी पर पैर रखते ही लकड़ी चरमराती।

आख़िरकार वह कमरे के दरवाज़े तक पहुँच गया।

दरवाज़ा थोड़ा खुला था।

उसने उसे धक्का दिया।

अंदर एक पुरानी मेज, कुर्सी और एक लालटेन रखी थी।

मेज पर धूल से ढकी एक डायरी पड़ी थी।

 


 

डायरी का पहला पन्ना

रोहन ने डायरी खोली।

पहले पन्ने पर लिखा था—

"अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो तुमने आवाज़ सुन ली है।"

अगली लाइन थी—

"इस कमरे में आने वाला हर व्यक्ति एक चीज़ भूल जाता है।"

रोहन ने पन्ना पलटा।

अगले पन्ने पर सिर्फ़ एक नाम लिखा था—

मोहन।

फिर दूसरा नाम।

सुरेश।

फिर तीसरा।

कई नाम थे।

आख़िरी नाम...

रोहन।

 


 

नीचे कौन था?

अचानक कमरे के नीचे से किसी ने सीढ़ियों पर कदम रखा।

रोहन ने टॉर्च नीचे की।

कोई दिखाई नहीं दिया।

फिर सीढ़ियाँ अपने आप हिलने लगीं।

ठक... ठक... ठक...

जैसे कोई अदृश्य व्यक्ति ऊपर आ रहा हो।

रोहन पीछे हट गया।

तभी कमरे की लालटेन अपने आप जल उठी।

उसकी रोशनी में दीवार पर एक तस्वीर दिखाई दी।

तस्वीर में गाँव के कई लोग खड़े थे।

उनमें एक आदमी रोहन को पहचान में आया।

वह उसके दादा थे।

 


 

दादा का रहस्य

रोहन ने घर लौटकर दादी से उस पेड़ के बारे में पूछा।

दादी का चेहरा बदल गया।

उन्होंने बताया कि रोहन के दादा करीब तीस साल पहले एक रात अचानक गायब हो गए थे।

उनकी आखिरी लोकेशन वही बरगद का पेड़ थी।

रोहन ने पूछा—

"क्या वे कभी वापस आए?"

दादी ने सिर हिलाया।

"नहीं।"

फिर कुछ देर बाद बोलीं—

"लेकिन उनके गायब होने के बाद हर साल उसी रात पेड़ के ऊपर लालटेन जलती थी।"

रोहन चुप हो गया।

 


 

आखिरी बार

अगली सुबह रोहन फिर पेड़ के पास गया।

दिन के उजाले में कमरा बिल्कुल सामान्य था।

लेकिन दरवाज़े पर अब एक नया नाम खुदा हुआ था।

रोहन।

उसने उसे छुआ।

लकड़ी अभी भी गर्म थी।

और तभी कमरे के अंदर से धीमी आवाज़ आई—

"अब तुम्हें क्या भूलना है?"

रोहन ने तुरंत हाथ पीछे खींच लिया।

वह उस दिन के बाद कभी पेड़ के पास नहीं गया।

गाँव में आज भी उस घटना को कई लोग एक real horror story in hindi के रूप में बताते हैं, हालांकि कोई यह साबित नहीं कर पाया कि उस पेड़ के ऊपर वास्तव में क्या था।

कुछ लोगों का कहना है कि वहाँ किसी पुराने परिवार की आत्मा रहती थी।

कुछ इसे महज़ डर और अफवाह मानते हैं।

लेकिन एक बात आज भी अजीब है।

हर साल उसी तारीख़ की रात पेड़ के ऊपर एक छोटी-सी लालटेन दिखाई देती है।

और अगर कोई उसके नीचे खड़ा होकर ध्यान से सुने...

तो ऊपर से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज़ आती है।

ऐसी horror story in hindi सुनने के बाद शायद आप भी किसी पुराने पेड़ के नीचे रात में खड़े होने से पहले दो बार सोचेंगे।

क्योंकि गाँव के बुज़ुर्ग आज भी कहते हैं—

"हर बंद कमरा खाली नहीं होता।"

और ऐसी ही कई unexpected stories में सबसे डरावनी बात यह होती है कि उनका जवाब कभी पूरी तरह नहीं मिलता।

शायद उस पेड़ पर बना कमरा आज भी किसी का इंतज़ार कर रहा है।

बस सवाल इतना है—

अगला नाम किसका होगा?

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