The Missing Shadow – गायब होती परछाई का रहस्य

Author : Divem Sharma | Published On : 16 Aug 2026

आदित्य को हमेशा से पुराने कैमरों का शौक था।

एक दिन उसे कबाड़ी की दुकान से एक पुराना फिल्म कैमरा मिला। दुकानदार ने कहा कि कैमरा खराब है, लेकिन आदित्य ने उसे खरीद लिया।

घर पहुँचकर उसने कैमरा साफ़ किया।

अंदर पहले से एक पुरानी फिल्म लगी हुई थी।

उसने सोचा—

"देखते हैं इसमें क्या है।"

 


 

पहली तस्वीर

आदित्य ने फिल्म विकसित करवाई।

तस्वीरें देखकर वह हैरान रह गया।

हर तस्वीर में अलग-अलग जगहें थीं।

एक पार्क।

एक रेलवे स्टेशन।

एक पुराना स्कूल।

लेकिन हर तस्वीर में एक चीज़ समान थी—

किसी की परछाई गायब थी।

लोग तस्वीर में मौजूद थे, लेकिन उनके पैरों के नीचे कोई shadow नहीं थी।

आदित्य को यह अजीब लगा।

 


 

आखिरी तस्वीर

फिल्म की आखिरी तस्वीर में एक कमरा दिखाई दे रहा था।

कमरे में एक कुर्सी थी।

और कुर्सी के सामने एक आदमी खड़ा था।

आदित्य ने ध्यान से देखा।

वह आदमी...

उसी जैसा दिख रहा था।

लेकिन तस्वीर के नीचे तारीख़ थी—

अगले दिन की।

 


 

कैमरा फिर चला

अगली सुबह आदित्य ने कैमरा उठाया।

उसने मज़ाक में अपनी एक तस्वीर खींच ली।

फिल्म खत्म हो गई।

कुछ देर बाद उसने फोटो विकसित की।

तस्वीर में आदित्य बिल्कुल साफ़ दिखाई दे रहा था।

लेकिन उसके पैरों के नीचे...

कोई परछाई नहीं थी।

आदित्य के हाथ काँपने लगे।

उसने तुरंत कमरे की लाइट बंद की।

उसकी असली परछाई दीवार पर मौजूद थी।

लेकिन तस्वीर में नहीं।

 


 

रात का डर

उस रात आदित्य को लगा कि उसके कमरे में कोई घूम रहा है।

उसने मोबाइल की टॉर्च जलाई।

कमरा खाली था।

फिर उसकी नजर दीवार पर गई।

उसकी परछाई वहाँ थी।

लेकिन वह आदित्य की हरकतों के साथ नहीं हिल रही थी।

आदित्य ने हाथ उठाया।

परछाई ने हाथ नहीं उठाया।

वह कुछ सेकंड बाद खुद हिली।

फिर उसने अपना सिर...

आदित्य की तरफ घुमा दिया।

 


 

पुराना मालिक

अगले दिन आदित्य कैमरा वापस कबाड़ी के पास ले गया।

दुकानदार ने कैमरा देखते ही कहा—

"तुमने इसे चला लिया?"

आदित्य ने पूछा—

"यह किसका था?"

दुकानदार ने बताया कि यह कैमरा करीब बीस साल पहले एक फोटोग्राफर का था।

उस फोटोग्राफर ने आखिरी दिनों में लोगों की तस्वीरें लेना शुरू किया था।

लेकिन उसकी तस्वीरों में लोगों की परछाइयाँ गायब होने लगी थीं।

कुछ समय बाद...

वह खुद गायब हो गया।

 


 

आखिरी तस्वीर

आदित्य ने कैमरा फिर से खोला।

अंदर फिल्म नहीं थी।

फिर भी कैमरे से एक क्लिक की आवाज़ आई।

चटाक!

उसके बाद फिल्म अपने आप बाहर निकल आई।

आदित्य ने उसे विकसित करवाया।

तस्वीर में वही कमरा था।

वही कुर्सी।

लेकिन इस बार कुर्सी पर आदित्य बैठा था।

उसके सामने कोई खड़ा था।

उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

सिर्फ़ उसकी परछाई थी।

 


 

आखिरी रात

रात में आदित्य ने कैमरा नष्ट करने का फैसला किया।

उसने हथौड़े से कैमरा तोड़ दिया।

कैमरा टूट गया।

लेकिन उसी समय कमरे की लाइट बंद हो गई।

दीवार पर उसकी परछाई दिखाई दी।

फिर धीरे-धीरे...

परछाई शरीर से अलग होकर फर्श पर उतर गई।

आदित्य पीछे हट गया।

परछाई दरवाज़े की तरफ चली।

दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

और वह अंधेरे में गायब हो गई।

 


 

अगली सुबह

आदित्य कमरे में नहीं था।

सिर्फ़ उसका मोबाइल और टूटा हुआ कैमरा मिला।

पुलिस ने कमरे की तलाशी ली।

कोई सुराग नहीं मिला।

लेकिन कैमरे के अंदर एक आखिरी तस्वीर थी।

उसमें आदित्य सड़क पर चलता हुआ दिखाई दे रहा था।

उसके पीछे एक लंबी परछाई थी।

लेकिन वह परछाई...

आदित्य की नहीं थी।

 


 

आज भी उस कैमरे को कबाड़ी की दुकान में एक बंद डिब्बे में रखा बताया जाता है।

कुछ लोग इस घटना को real horror story in hindi कहते हैं, जबकि कुछ इसे एक डरावनी अफवाह मानते हैं।

लेकिन जिसने भी उस कैमरे की तस्वीरें देखी हैं, वह एक बात जरूर कहता है—

"तस्वीर में अपनी परछाई जरूर देखना।"

क्योंकि ऐसी horror story in hindi में असली डर किसी भूत को देखने का नहीं...

बल्कि अपनी ही परछाई को खुद से अलग होते देखने का है।

और ऐसी unexpected stories में सबसे डरावना सवाल शायद यही है—

अगर परछाई तुम्हारी नहीं रही... तो वह किसकी हो गई?

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