The Mirror That Showed a Stranger – वह आईना जिसमें कोई अजनब�

Author : Divant Sharma | Published On : 23 Oct 2026

रिया को अपने नए घर के स्टोर रूम में एक बड़ा पुराना आईना मिला।

आईने का फ्रेम काले रंग की लकड़ी का था।

उसने उसे साफ़ करके अपने बेडरूम में लगा दिया।

पहली रात सब सामान्य था।

लेकिन दूसरी रात जब रिया आईने के सामने बाल बना रही थी, उसे अपने पीछे एक आदमी दिखाई दिया।

वह पलटी।

कमरे में कोई नहीं था।

जब उसने फिर आईने में देखा, आदमी अब भी वहीं खड़ा था।

 


 

आईने वाला आदमी

रिया ने आईने को दीवार से उतार दिया।

उसने सोचा कि शायद उसे भ्रम हुआ है।

लेकिन रात में जब वह पानी पीने उठी, आईने में फिर वही आदमी दिखाई दिया।

इस बार वह पहले से करीब था।

उसने काँच पर उँगली से कुछ लिखा—

"मुझे बाहर निकालो।"

रिया डरकर कमरे से बाहर भाग गई।

अगली सुबह उसने आईने को कपड़े से ढक दिया।

 


 

पुरानी मालकिन

रिया ने मकान मालिक से आईने के बारे में पूछा।

मकान मालिक कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने बताया कि घर की पिछली मालकिन एक चित्रकार थी।

वह आईने के सामने बैठकर लोगों के चित्र बनाया करती थी।

एक दिन वह अचानक गायब हो गई।

उसके कमरे में सिर्फ़ वही आईना मिला था।

मकान मालिक ने कहा—

"हमने इसे फेंकने की कोशिश की थी। लेकिन हर बार यह वापस आ जाता था।"

रिया ने पूछा—

"कैसे?"

मकान मालिक ने जवाब नहीं दिया।

 


 

आईने पर उभरा नाम

उस रात रिया ने आईने को स्टोर रूम में बंद कर दिया।

लेकिन आधी रात को उसके बेडरूम का दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

फर्श पर गीले पैरों के निशान थे।

वे निशान स्टोर रूम तक जा रहे थे।

रिया ने दरवाज़ा खोला।

आईने पर धूल के बीच एक नाम लिखा था—

रिया।

उसके नीचे एक तारीख थी।

अगले दिन की।

 


 

दूसरा चेहरा

रिया ने आईने को तोड़ने के लिए हथौड़ा उठाया।

जैसे ही उसने हथौड़ा ऊपर किया, आईने में दिखाई देने वाले आदमी ने भी वैसा ही किया।

लेकिन उसके हाथ में हथौड़ा नहीं था।

उसके हाथ में एक तस्वीर थी।

तस्वीर में रिया बचपन में अपनी माँ के साथ खड़ी थी।

रिया ने तस्वीर पहचान ली।

वह तस्वीर उसके घर में कहीं नहीं थी।

आईने वाले आदमी ने काँच पर हाथ रखा।

फिर होंठ हिलाए—

"तुम मुझे पहले भी देख चुकी हो।"

रिया को अचानक बचपन की एक घटना याद आई।

वह अपनी माँ के साथ पुराने घर में रहती थी।

उस घर में भी ऐसा ही आईना था।

एक दिन उसकी माँ ने आईने को ढककर कहा था—

"इसमें कभी अकेले मत देखना।"

 


 

काँच के पीछे

रिया ने कपड़ा हटाया।

आईने में अब उसका अपना चेहरा नहीं दिख रहा था।

वहाँ एक छोटा कमरा था।

कमरे के अंदर एक औरत बैठी थी।

वह रिया की माँ जैसी दिखती थी।

औरत ने हाथ उठाकर काँच पर रखा।

उसके पीछे वही आदमी खड़ा था।

रिया ने चिल्लाकर पूछा—

"तुम कौन हो?"

आदमी ने जवाब दिया—

"मैं वह हूँ, जिसे तुम्हारी माँ ने यहाँ बंद किया था।"

 


 

अगली सुबह रिया के घर का दरवाज़ा खुला मिला।

वह कहीं नहीं थी।

आईना बेडरूम की दीवार पर लगा था।

उसमें अब एक नया चेहरा दिखाई देता था।

रिया का।

और वह लगातार काँच पर दस्तक दे रही थी।

अगर आपको real horror story in hindi जैसी कहानियाँ पसंद हैं, तो आईने का यह रहस्य एक सवाल छोड़ता है—

क्या आईना हमारा चेहरा दिखाता है, या कभी-कभी वह किसी दूसरी दुनिया का दरवाज़ा बन जाता है?

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