The Man in the Mirror – आईने में दिखने वाला आदमी
Author : Divant Sharma | Published On : 17 Sep 2026
रात के करीब 10 बजे विवेक को अचानक बाल कटवाने की जरूरत पड़ गई।
बाज़ार लगभग बंद हो चुका था।
तभी उसे एक छोटी-सी पुरानी नाई की दुकान दिखाई दी।
बाहर कोई बोर्ड नहीं था।
बस दरवाज़े पर लिखा था—
"अंदर आइए।"
विवेक अंदर चला गया।
दुकान में एक बूढ़ा नाई बैठा था।
उसने बिना कुछ पूछे कुर्सी की तरफ इशारा किया।
विवेक बैठ गया।
सामने बड़ा आईना था।
नाई ने बाल काटने शुरू किए।
विवेक ने आईने में देखा।
उसे अपनी परछाईं दिखाई दी।
लेकिन कुछ सेकंड बाद उसे लगा कि आईने में उसका सिर थोड़ा देर से हिल रहा है।
उसने सिर दाईं तरफ किया।
आईने वाला विवेक दो सेकंड बाद दाईं तरफ हुआ।
विवेक ने नाई से पूछा—
"आईना ठीक है?"
नाई ने जवाब नहीं दिया।
बस धीरे से बोला—
"आईने में ज्यादा देर मत देखना।"
विवेक ने तुरंत नजर हटा ली।
कुछ मिनट बाद नाई ने कहा—
"हो गया।"
विवेक उठने लगा।
तभी उसकी नजर आईने पर गई।
आईने में कुर्सी पर कोई बैठा था।
विवेक खुद।
लेकिन असली कुर्सी खाली थी।
आईने वाला विवेक धीरे-धीरे मुस्कुराया।
फिर उसने हाथ उठाकर आईने पर तीन बार दस्तक दी।
ठक... ठक... ठक...
विवेक पीछे हट गया।
नाई ने तुरंत आईने पर कपड़ा डाल दिया।
"अब बाहर जाओ।"
विवेक दुकान से बाहर निकल आया।
लेकिन सड़क पर पहुँचकर उसे एहसास हुआ कि उसके हाथ में अपना मोबाइल नहीं था।
वह वापस दुकान की तरफ गया।
दुकान गायब थी।
वहाँ सिर्फ़ एक बंद शटर था।
पास की दुकान वाले ने कहा—
"यह दुकान तो पाँच साल से बंद है।"
विवेक ने कहा—
"लेकिन अभी-अभी मैं अंदर से बाल कटवाकर आया हूँ।"
दुकानदार ने उसकी तरफ देखा।
फिर शटर पर लगी पुरानी फोटो दिखाई।
फोटो में वही बूढ़ा नाई था।
नीचे लिखा था—
"मृत्यु – पाँच वर्ष पहले।"
विवेक घर पहुँचा।
उसने अपना मोबाइल ढूँढना शुरू किया।
फोन बाथरूम के आईने के सामने रखा मिला।
उसने फोन उठाया।
स्क्रीन अपने आप ऑन हुई।
कैमरा खुला था।
उसमें विवेक दिखाई दे रहा था।
लेकिन उसके पीछे...
वही बूढ़ा नाई खड़ा था।
विवेक ने तुरंत पीछे देखा।
कोई नहीं था।
फिर फोन की स्क्रीन पर एक मैसेज आया—
"अगली बार आईने में मत देखना।"
अगली सुबह विवेक ने घर के सभी आईने कपड़े से ढक दिए।
लेकिन रात को बाथरूम से आवाज़ आई—
ठक... ठक... ठक...
विवेक दरवाज़े के बाहर खड़ा रहा।
आवाज़ फिर आई।
इस बार किसी ने कहा—
"बाल तो ठीक करवा लिए... चेहरा कब बदलोगे?"
विवेक ने दरवाज़ा नहीं खोला।
सुबह जब उसने दरवाज़ा खोला तो आईने पर धुंध जमी थी।
उस धुंध पर उंगली से सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—
"अगली बार।"
इस घटना को कुछ लोग real horror story in hindi मानते हैं।
पुराने बाज़ार के लोग आज भी उस दुकान की कहानी बताते हैं, हालांकि वहाँ अब एक बंद शटर के अलावा कुछ नहीं है।
ऐसी horror story in hindi में डर इस बात से नहीं कि आईने में कोई भूत दिख गया।
डर इस बात से है कि कभी-कभी आईना आपका चेहरा नहीं...
आपका दूसरा रूप दिखाता है।
और ऐसी unexpected stories का सबसे अजीब हिस्सा यही है—
विवेक के घर का आईना आज भी रात 10 बजे के बाद उसकी परछाईं नहीं दिखाता।
पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in
