The Footsteps on the Empty Roof – खाली छत पर किसी के कदम

Author : Divant Sharma | Published On : 27 Oct 2026

दीपक एक तीन मंज़िला इमारत में रहता था।

उसका फ्लैट सबसे ऊपर था।

छत पर जाने वाला दरवाज़ा हमेशा बंद रहता था।

लेकिन हर रात करीब दो बजे उसे छत से कदमों की आवाज़ सुनाई देती।

धप...

धप...

धप...

पहले उसने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा।

लेकिन इमारत में सबसे ऊपर उसका ही फ्लैट था।

 


 

छत पर कौन चलता था?

एक रात दीपक ने चौकीदार से पूछा—

"रात में छत पर कौन जाता है?"

चौकीदार ने कहा—

"कोई नहीं। चाबी तो मेरे पास रहती है।"

दीपक ने पूछा—

"फिर कदमों की आवाज़ कहाँ से आती है?"

चौकीदार ने कुछ देर उसे देखा।

फिर बोला—

"अगर आवाज़ सुनाई दे, तो छत का दरवाज़ा मत खोलना।"

 


 

चाबी गायब थी

अगली रात दीपक ने चौकीदार से चाबी माँगी।

वह छत पर जाकर देखना चाहता था।

चौकीदार ने साफ़ मना कर दिया।

लेकिन जब दीपक अपने फ्लैट में लौटा, तो दरवाज़े के नीचे एक चाबी पड़ी थी।

उस पर लिखा था—

छत।

दीपक चाबी लेकर ऊपर गया।

दरवाज़ा खुल गया।

छत पर तेज़ हवा चल रही थी।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

 


 

गीले पैरों के निशान

दीपक वापस जाने लगा।

तभी उसने फर्श पर गीले पैरों के निशान देखे।

वे छत के बीच से शुरू होकर उसके फ्लैट के दरवाज़े तक जा रहे थे।

दीपक ने नीचे देखा।

उसके पैरों के निशान सूखे थे।

फिर ये निशान किसके थे?

अचानक पीछे से आवाज़ आई—

"तुमने बहुत देर कर दी।"

दीपक पलटा।

छत खाली थी।

 


 

पुरानी घटना

अगले दिन दीपक ने बिल्डिंग के पुराने रिकॉर्ड देखे।

उसे पता चला कि कई साल पहले इसी इमारत की छत से एक आदमी गायब हो गया था।

उसका नाम भी दीपक था।

वह तीसरी मंज़िल पर रहता था।

रिकॉर्ड में उसकी मृत्यु का कोई प्रमाण नहीं था।

बस एक नोट लिखा था—

"आखिरी बार छत पर देखा गया।"

दीपक ने चौकीदार को रिकॉर्ड दिखाया।

चौकीदार ने सिर झुका लिया।

"साहब, कुछ लोग कहते हैं कि वह आज भी घर लौटने की कोशिश करता है।"

 


 

दरवाज़े के बाहर

उस रात दीपक ने छत का दरवाज़ा बंद कर दिया।

चाबी अपनी जेब में रखी।

ठीक दो बजे कदमों की आवाज़ आई।

इस बार आवाज़ छत से नहीं आ रही थी।

वह उसके फ्लैट के बाहर थी।

धप...

धप...

धप...

फिर दरवाज़े पर दस्तक हुई।

दीपक ने दरवाज़े के नीचे से देखा।

बाहर दो जोड़ी पैर खड़े थे।

एक जोड़ी उसके जैसे जूते पहने हुए थी।

दूसरी के पैर नंगे थे और उनसे पानी टपक रहा था।

बाहर से आवाज़ आई—

"दरवाज़ा खोलो। मैं छत से वापस आ गया हूँ।"

 


 

सुबह चौकीदार ने दीपक के फ्लैट का दरवाज़ा खुला पाया।

अंदर कोई नहीं था।

छत की चाबी मेज़ पर रखी थी।

लेकिन अब बिल्डिंग के रिकॉर्ड में दो नाम गायब थे।

पहला, पुराने दीपक का।

दूसरा, नए दीपक का।

अगर आप real horror story in hindi जैसी कहानियाँ पढ़ते हैं, तो खाली छत का यह रहस्य आपको भी सोचने पर मजबूर करेगा।

क्योंकि कभी-कभी कदमों की आवाज़ ऊपर से नहीं आती...

वह किसी ऐसे इंसान की होती है, जो आपकी जगह लेने वापस आया है।

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