The Devil's Diary – शैतान की डायरी | Real Horror Story in Hindi

Author : Divem Sharma | Published On : 06 Aug 2026

रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में स्थित एक सौ साल पुरानी किताबों की दुकान बंद होने ही वाली थी। दुकान का मालिक आख़िरी बार अलमारियाँ देख रहा था कि तभी एक काले कपड़ों में लिपटा बूढ़ा आदमी अंदर आया।

उसके हाथ में चमड़े की एक पुरानी डायरी थी।

उसने दुकान के मालिक से कहा,

"इसे बेच देना... लेकिन खुद कभी मत पढ़ना।"

इतना कहकर वह आदमी दुकान से बाहर चला गया।

दुकानदार कुछ सेकंड बाद उसके पीछे भागा...

लेकिन पूरी गली खाली थी।

जैसे वहाँ कोई आया ही न हो।

 


 

एक अजीब खरीद

कुछ दिनों बाद लेखक विवान उस दुकान पर पहुँचा। उसे पुरानी किताबें और रहस्यमयी चीज़ें इकट्ठा करने का शौक था।

दुकानदार ने हिचकिचाते हुए वही पुरानी डायरी उसे दिखा दी।

डायरी का कवर पूरी तरह काला था।

उस पर लाल रंग से सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—

"DON'T READ"

जितना मना किया गया...

विवान की उत्सुकता उतनी ही बढ़ती गई।

उसने बिना देर किए डायरी खरीद ली।

अगर आपको real horror story in hindi पढ़ना पसंद है, तो यह कहानी आपको आख़िरी पंक्ति तक बाँधे रखेगी।

 


 

पहला पन्ना

घर पहुँचकर विवान ने डायरी खोली।

पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—

"अगर तुम यह पढ़ रहे हो... तो अब यह डायरी तुम्हारी नहीं, तुम इसके हो।"

विवान हँस पड़ा।

उसे लगा किसी लेखक ने डराने के लिए ऐसा लिखा होगा।

लेकिन जैसे ही उसने दूसरा पन्ना पलटा...

पूरा कमरा अचानक बर्फ़ जैसा ठंडा हो गया।

 


 

बदलती हुई लिखावट

हर पन्ने पर किसी अलग व्यक्ति की लिखावट थी।

किसी ने अंग्रेज़ी में लिखा था।

किसी ने हिंदी में।

किसी ने ऐसी भाषा में...

जिसे विवान समझ ही नहीं पाया।

लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि जैसे-जैसे वह पढ़ता गया...

लिखावट अपने आप बदलने लगी।

कुछ मिनट बाद डायरी में वही शब्द दिखाई देने लगे...

जो विवान अपने मन में सोच रहा था।

 


 

आधी रात का फोन

रात ठीक 12:12 बजे उसका मोबाइल बजा।

स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।

उसने कॉल रिसीव की।

दूसरी तरफ़ से सिर्फ़ एक आवाज़ आई—

"पेज नंबर तेरह मत खोलना..."

फोन तुरंत कट गया।

विवान ने दोबारा कॉल करने की कोशिश की।

लेकिन कॉल हिस्ट्री में कोई नंबर था ही नहीं।

 


 

पेज नंबर 13

जिज्ञासा के कारण उसने सीधे तेरहवाँ पन्ना खोला।

वहाँ उसकी अपनी तस्वीर बनी हुई थी।

तस्वीर के नीचे लिखा था—

"मृत्यु की तारीख़ – कल रात।"

विवान के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसने तुरंत डायरी बंद कर दी।

 


 

आईने में परछाई

वह पानी पीने के लिए उठा।

जैसे ही उसने आईने में देखा...

उसके पीछे एक लंबा काला साया खड़ा था।

वह धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा था।

विवान तुरंत पीछे मुड़ा।

कमरा खाली था।

लेकिन आईने में वह साया अब भी मौजूद था।

 


 

जलाने की कोशिश

डरकर उसने डायरी को आग लगाने की कोशिश की।

माचिस जलाई।

आग डायरी को छूते ही बुझ गई।

उसने दोबारा कोशिश की।

इस बार पूरी बिजली चली गई।

कमरे में घुप्प अंधेरा छा गया।

और उसी अंधेरे में किसी ने फुसफुसाकर कहा—

"मुझे आग से डर नहीं लगता..."

 


 

नई लिखावट

सुबह जब उसने डायरी खोली...

तो उसमें एक नया पन्ना जुड़ चुका था।

उस पर सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—

"तुमने मुझे जलाने की कोशिश की..."

विवान के हाथ काँपने लगे।

उसने यह बात किसी को नहीं बताई थी।

फिर डायरी को कैसे पता चला?

 


 

पुराना चर्च

सच्चाई जानने के लिए वह शहर के एक पुराने चर्च पहुँचा।

वहाँ के बुज़ुर्ग पादरी ने डायरी देखते ही उसे कपड़े में लपेट दिया।

उन्होंने कहा—

"यह डायरी हर सौ साल में एक नया मालिक चुनती है।"

"जो इसे पढ़ना शुरू करता है...

वह इसे कभी पूरा नहीं छोड़ पाता।"

 


 

आख़िरी लेखक

पादरी ने उसे एक पुरानी तस्वीर दिखाई।

उसमें 1926 का एक प्रसिद्ध लेखक था।

उसकी मौत रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी।

जब विवान ने तस्वीर को गौर से देखा...

उस लेखक के हाथ में वही काली डायरी थी।

 


 

कैमरे का सच

घर लौटकर विवान ने अपने कमरे का CCTV देखा।

रात भर कैमरा रिकॉर्डिंग करता रहा था।

वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा था कि रात तीन बजे विवान गहरी नींद में था।

लेकिन उसी समय...

डायरी अपने आप खुली।

उसके पन्ने अपने आप पलटने लगे।

और आख़िरी पन्ने पर किसी ने अदृश्य हाथ से कुछ लिखा।

 


 

आख़िरी पन्ना

अगली सुबह उसने काँपते हाथों से डायरी खोली।

आख़िरी पन्ने पर लिखा था—

"अब कहानी पूरी हो गई..."

नीचे एक नई लाइन उभरने लगी।

धीरे-धीरे...

अक्षर अपने आप बनते गए।

"अब अगला लेखक तुम्हें यह डायरी देगा..."

उसी समय दरवाज़े की घंटी बजी।

विवान ने दरवाज़ा खोला।

बाहर कोई नहीं था।

सिर्फ़ एक पुराना लिफाफा रखा था।

उस पर लिखा था—

"Deliver to the Next Reader."

और उसके नीचे...

उसके अपने हस्ताक्षर थे।

 


 

अंत

आज भी पुरानी किताबों की दुकानों में कभी-कभी बिना नाम की काली डायरी मिलने की बातें सुनने को मिलती हैं।

लोग कहते हैं कि उसे खरीदने वाला हर व्यक्ति एक ही गलती करता है—

वह पहला पन्ना खोल देता है।

अगर आपको कभी ऐसी कोई पुरानी डायरी मिले जिस पर लिखा हो—

"मत पढ़ो..."

तो उस चेतावनी को मज़ाक मत समझिए।

क्योंकि कुछ किताबें पढ़ने के लिए नहीं...

अपने अगले लेखक को चुनने के लिए बनाई जाती हैं।

अगर आपको ऐसी horror story in hindi पसंद है, तो ऐसी unexpected stories यही साबित करती हैं कि सबसे डरावनी चीज़ हमेशा किसी वीरान जगह पर नहीं मिलती...

कभी-कभी वह एक साधारण-सी पुरानी किताब भी हो सकती है।

 

 पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in