The Dead Station – मरा हुआ रेलवे स्टेशन

Author : Divant Sharma | Published On : 09 Aug 2026

रात के 1:47 बज रहे थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिले में स्थित रामपुर रोड रेलवे स्टेशन पूरी तरह सुनसान पड़ा था। कभी यह स्टेशन यात्रियों से भरा रहता था, लेकिन एक भयानक रेल हादसे के बाद इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

आज वहाँ कोई ट्रेन नहीं रुकती।

न कोई टिकट खिड़की खुलती है।

न कोई घोषणा होती है।

फिर भी आसपास के गाँव वाले दावा करते हैं कि हर महीने की 13 तारीख़, ठीक रात 1:47 बजे, स्टेशन पर एक ट्रेन आती है।

उस ट्रेन की आवाज़ हर कोई सुन सकता है...

लेकिन उसे देख हर कोई नहीं सकता।

और जो देख ले...

उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है।

अगर आपको real horror story in hindi पढ़ना पसंद है, तो यह कहानी आपको आख़िर तक बाँधे रखेगी।

 


 

बंद स्टेशन का रहस्य

निखिल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर था। उसे भारत की रहस्यमयी और भुला दी गई जगहों पर वीडियो बनाना पसंद था।

एक दिन उसे एक बुज़ुर्ग रेलवे कर्मचारी का इंटरव्यू मिला।

बुज़ुर्ग ने कैमरे के सामने सिर्फ़ एक बात कही—

"अगर उस स्टेशन पर ट्रेन आए... तो उसमें चढ़ना मत।"

निखिल ने पूछा—

"क्यों?"

बुज़ुर्ग की आँखों में अचानक डर उतर आया।

उन्होंने जवाब दिया—

**"क्योंकि वह ट्रेन यात्रियों को लेकर नहीं जाती...

उन्हें वापस लेने आती है।"**

 


 

पहली रात

13 तारीख़ की रात निखिल अपने कैमरे के साथ स्टेशन पहुँचा।

पूरा प्लेटफॉर्म धूल से ढका हुआ था।

रेल की पटरियों पर घास उग चुकी थी।

स्टेशन की घड़ी कई सालों से 1:47 पर रुकी हुई थी।

उसने कैमरा ऑन किया।

हवा बिल्कुल शांत थी।

लेकिन अचानक...

लाउडस्पीकर अपने आप चालू हो गया।

**"यात्रीगण कृपया ध्यान दें...

प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आने वाली अंतिम ट्रेन कुछ ही क्षणों में पहुँचने वाली है।"**

स्टेशन पर बिजली नहीं थी।

फिर यह घोषणा किसने की?

 


 

धुएँ से निकली ट्रेन

कुछ ही सेकंड बाद दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी।

अंधेरे में एक पीली रोशनी दिखाई दी।

धीरे-धीरे एक पुरानी भाप इंजन वाली ट्रेन स्टेशन पर आकर रुक गई।

उसके डिब्बों पर कोई नंबर नहीं था।

सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—

RETURN

दरवाज़े अपने आप खुल गए।

अंदर बैठे सभी यात्री बिल्कुल शांत थे।

किसी की आँखें झपक नहीं रही थीं।

कोई साँस लेता हुआ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

 


 

टिकट चेकर

एक बूढ़ा टिकट चेकर धीरे-धीरे निखिल के पास आया।

उसने बिना कुछ कहे हाथ आगे बढ़ाया।

उसकी हथेली में एक पुराना टिकट था।

टिकट पर निखिल का नाम लिखा था।

यात्रा की तारीख़...

13 अगस्त 2041

जबकि अभी 2026 चल रहा था।

 


 

खाली डिब्बा

निखिल डरते हुए पहले डिब्बे के दरवाज़े तक गया।

अंदर सभी सीटें खाली थीं।

लेकिन सीटों पर धूल नहीं थी।

जैसे अभी-अभी कोई उठकर गया हो।

अचानक पीछे से किसी बच्चे की आवाज़ आई—

**"अंकल...

मेरी मम्मी को देखा है?"**

उसने मुड़कर देखा।

सात-आठ साल का एक लड़का खड़ा था।

उसके कपड़े पुराने थे।

चेहरा मासूम था।

लेकिन उसकी परछाई नहीं थी।

 


 

आख़िरी डिब्बा

बच्चा निखिल का हाथ पकड़कर आख़िरी डिब्बे तक ले गया।

वहाँ अंदर दर्जनों पुराने सूटकेस रखे थे।

हर सूटकेस पर एक नाम लिखा था।

निखिल की नज़र अचानक एक नए सूटकेस पर पड़ी।

उस पर साफ़ लिखा था—

NIKHIL SHARMA

उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।

उसने सूटकेस खोलने की कोशिश की।

ताला अपने आप खुल गया।

अंदर उसके अपने कपड़े...

उसका कैमरा...

और उसका पहचान पत्र रखा था।

 


 

रिकॉर्डिंग

डरकर वह ट्रेन से नीचे उतर आया।

लेकिन कैमरे की स्क्रीन अपने आप चालू हो गई।

वीडियो में वह खुद ट्रेन के अंदर बैठा हुआ दिखाई दे रहा था।

वह खिड़की से बाहर देखकर मुस्कुरा रहा था।

जबकि असलियत में वह प्लेटफॉर्म पर खड़ा था।

 


 

स्टेशन मास्टर का कमरा

भागते-भागते वह स्टेशन मास्टर के पुराने कमरे में घुस गया।

टेबल पर एक रजिस्टर खुला पड़ा था।

उसकी आख़िरी एंट्री थी—

13 अगस्त 1998

नीचे लिखा था—

"आज रात आने वाली ट्रेन को कोई नहीं रोकेगा।"

उसके बाद सभी पन्ने खाली थे।

लेकिन अचानक...

एक अदृश्य कलम अपने आप चलने लगी।

नए पन्ने पर लिखा गया—

13 अगस्त 2026

Passenger Added: Nikhil

 


 

भागने की कोशिश

निखिल पूरी ताकत से स्टेशन के बाहर भागा।

लेकिन जितना वह दौड़ता...

उतना ही वापस उसी प्लेटफॉर्म पर पहुँच जाता।

जैसे स्टेशन उसे जाने ही नहीं दे रहा था।

तभी वही बच्चा फिर दिखाई दिया।

उसने मुस्कुराकर कहा—

**"अगर वापस जाना है...

तो पीछे मत देखना।"**

निखिल ने आँखें बंद कीं और दौड़ता रहा।

कुछ मिनट बाद...

उसे सड़क की आवाज़ सुनाई दी।

जब उसने आँखें खोलीं...

वह स्टेशन से कई किलोमीटर दूर खड़ा था।

 


 

आख़िरी वीडियो

घर लौटकर उसने कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी।

वीडियो के आख़िरी दस सेकंड में...

वह ट्रेन में बैठा दिखाई दे रहा था।

ट्रेन धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।

वह कैमरे की तरफ़ देखकर हाथ हिला रहा था।

और उसके पीछे...

सभी यात्री बिना पलक झपकाए उसे देख रहे थे।

फिर स्क्रीन काली हो गई।

 


 

अंत

कुछ दिनों बाद निखिल ने वह वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करने की कोशिश की।

हर बार वीडियो अपने आप डिलीट हो जाता।

लेकिन एक तस्वीर हमेशा बच जाती।

उस तस्वीर में बंद पड़ा स्टेशन दिखाई देता था।

प्लेटफॉर्म पर कोई नहीं था।

सिवाय एक आदमी के...

जो बिल्कुल निखिल जैसा दिखता था।

अगर कभी किसी बंद रेलवे स्टेशन पर आपको ट्रेन की सीटी सुनाई दे...

तो उत्सुकता में वहाँ मत रुकिए।

क्योंकि कुछ ट्रेनें यात्रियों को मंज़िल तक पहुँचाने के लिए नहीं...

बल्कि उन्हें हमेशा के लिए अपने साथ ले जाने के लिए आती हैं।

अगर आपको ऐसी horror story in hindi पसंद है, तो ऐसी unexpected stories यही याद दिलाती हैं कि हर बंद स्टेशन सचमुच खाली नहीं होता।

 

 पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in