The Dead Radio Station – मौत का रेडियो स्टेशन

Author : Divem Sharma | Published On : 27 Jul 2026

रेडियो की दुनिया कभी लोगों की ज़िंदगी का सबसे बड़ा मनोरंजन हुआ करती थी। रात के कार्यक्रम, पुराने गाने और आरजे की आवाज़ लाखों लोगों तक पहुँचती थी। लेकिन शहर के बाहर एक ऐसा रेडियो स्टेशन था जिसे लगभग बीस साल पहले हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

फिर भी लोग दावा करते थे कि हर रात ठीक 1:13 AM पर उसी फ़्रीक्वेंसी से एक लाइव शो शुरू होता है।

अजीब बात यह थी कि उस फ़्रीक्वेंसी का अस्तित्व अब सरकारी रिकॉर्ड में भी नहीं था।

आज की real horror story in hindi उसी रहस्यमयी रेडियो स्टेशन की कहानी है।

 


 

बंद इमारत

शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर पुरानी इमारत खड़ी थी।

उसके बाहर जंग लगा बोर्ड था—

"Radio 91.3 FM"

खिड़कियों के शीशे टूट चुके थे।

मुख्य गेट पर ताला लगा था।

लेकिन रात होते ही अंदर से हल्की पीली रोशनी दिखाई देती थी।

स्थानीय लोग कहते थे कि स्टेशन का आखिरी प्रसारण कभी खत्म ही नहीं हुआ।

 


 

समीर की जिज्ञासा

समीर एक पॉडकास्ट निर्माता था।

उसे पुराने रेडियो स्टेशनों पर डॉक्यूमेंट्री बनानी थी।

जब उसने इस जगह के बारे में सुना, तो उसने पूरी रात वहीं बिताने का फैसला किया।

एक चाय वाले ने उसे जाते समय चेतावनी दी—

"अगर रेडियो पर तुम्हारा नाम सुनाई दे...

तो जवाब मत देना।"

समीर मुस्कुरा दिया।

उसे लगा, लोग बस कहानियाँ बना रहे हैं।

 


 

स्टूडियो नंबर 2

रात के लगभग बारह बजे वह इमारत के अंदर पहुँचा।

स्टूडियो की दीवारों पर पुराने ध्वनि-रोधक फोम लगे थे।

मिक्सिंग कंसोल धूल से ढका हुआ था।

माइक्रोफोन जंग खा चुका था।

लेकिन जैसे ही उसने कमरे में कदम रखा...

सभी मशीनों की छोटी-छोटी लाइटें अपने आप जल उठीं।

हेडफोन से धीमी आवाज़ आने लगी—

"हमारा अगला मेहमान आ चुका है..."

समीर के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

उसे पहली बार महसूस हुआ कि यह किसी साधारण horror story in hindi जैसी घटना नहीं थी।

 


 

लाइव प्रसारण

घड़ी में 1:13 बजते ही लाल रंग का ON AIR साइन अपने आप जल उठा।

स्पीकर से एक मधुर लेकिन अजीब आवाज़ सुनाई दी—

"दोस्तों...

आज की रात हमारे साथ एक नया श्रोता मौजूद है..."

फिर कुछ सेकंड की खामोशी।

इसके बाद आरजे ने समीर का पूरा नाम लिया।

समीर का गला सूख गया।

उसने कभी अपना नाम किसी को नहीं बताया था।

 


 

रिकॉर्डिंग रूम

स्टूडियो के पीछे एक छोटा रिकॉर्डिंग रूम था।

वहाँ सैकड़ों पुरानी टेप रखी थीं।

हर टेप पर एक तारीख और एक नाम लिखा था।

आखिरी टेप पर लिखा था—

समीर – आज

उसने काँपते हाथों से टेप प्लेयर चालू किया।

टेप में उसकी अपनी आवाज़ रिकॉर्ड थी।

लेकिन वह ऐसी बातें कर रहा था जो उसने कभी कही ही नहीं थीं।

टेप के आखिर में उसकी आवाज़ आई—

"मैं वापस नहीं जा पाया..."

कई लोग इस तरह की घटनाओं को सिर्फ short horror story in hindi समझकर भूल जाते हैं, लेकिन उस रात समीर के सामने हर चीज़ उसकी समझ से बाहर थी।

 


 

कंट्रोल रूम

समीर कंट्रोल रूम में पहुँचा।

दीवार पर पुराने आरजे की तस्वीर लगी थी।

तस्वीर के नीचे लिखा था—

"अंतिम प्रसारण – 14 अगस्त 2004"

उसी समय तस्वीर में मौजूद आरजे मुस्कुराने लगा।

धीरे-धीरे उसकी आँखें कैमरे की तरफ घूम गईं।

समीर घबरा गया।

लेकिन असली डर अभी बाकी था।

 


 

पुरानी डायरी

मेज़ पर रखी डायरी स्टेशन मैनेजर की थी।

उसमें लिखा था कि आखिरी लाइव शो के दौरान बिजली चली गई थी।

जब दोबारा बिजली आई...

पूरी टीम गायब थी।

स्टूडियो अंदर से बंद था।

माइक्रोफोन चालू था।

लेकिन अंदर कोई नहीं था।

उस दिन के बाद हर रात उसी समय रहस्यमयी प्रसारण सुनाई देने लगा।

यहीं से इस mystery story hindi का सबसे बड़ा रहस्य सामने आया।

 


 

आखिरी कॉल

अचानक स्टूडियो का पुराना टेलीफोन बज उठा।

ट्रिन... ट्रिन...

समीर ने काँपते हाथों से रिसीवर उठाया।

दूसरी तरफ से आवाज़ आई—

"तुम अभी भी बाहर क्यों हो?

तुम्हारा शो शुरू होने वाला है..."

फोन अपने आप कट गया।

उसी समय ON AIR का बोर्ड पहले से भी तेज़ चमकने लगा।

स्टूडियो के बाहर से तालियों की आवाज़ आने लगी।

लेकिन इमारत में उसके अलावा कोई नहीं था।

 


 

स्टूडियो में कौन बैठा था?

समीर धीरे-धीरे मुख्य स्टूडियो में पहुँचा।

आरजे की कुर्सी खाली नहीं थी।

कोई वहाँ बैठा था।

उसने धीरे-धीरे अपनी कुर्सी घुमाई।

वह समीर ही था।

लेकिन उसके चेहरे पर अजीब मुस्कान थी।

उसने माइक्रोफोन की तरफ देखकर कहा—

"श्रोताओं...

आज हमारे साथ एक नया मेज़बान जुड़ गया है।"

कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं।

 


 

आखिरी रिकॉर्डिंग

अगली सुबह पुलिस को रेडियो स्टेशन के बाहर समीर की कार मिली।

कैमरा अंदर पड़ा था।

रिकॉर्डिंग के आखिरी दस सेकंड में समीर माइक्रोफोन के सामने बैठा दिखाई देता है।

वह मुस्कुरा रहा था।

फिर उसने धीरे-धीरे कहा—

"अगर तुम यह आवाज़ सुन रहे हो...

तो अगला शो तुम्हारे नाम होगा।"

वीडियो यहीं खत्म हो जाती है।

आज भी कुछ रेडियो प्रेमी दावा करते हैं कि रात के 1:13 बजे कभी-कभी एक अनजान फ़्रीक्वेंसी पर धीमी आवाज़ सुनाई देती है।

अगर उस प्रसारण में कोई तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें बुलाए...

तो रेडियो तुरंत बंद कर देना।

क्योंकि कुछ कार्यक्रम कभी समाप्त नहीं होते...

वे बस अपने अगले श्रोता का इंतज़ार करते रहते हैं।

इसी वजह से लोग इसे सिर्फ एक suspense story hindi नहीं, बल्कि शहर की सबसे रहस्यमयी और डरावनी घटनाओं में से एक मानते हैं।


 

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